सिंधुदुर्ग किला का इतिहास और घूमने की पूरी जानकारी – Complete information of Sindhudurg Fort in Hindi

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सिंधुदुर्ग किला महाराष्ट्र राज्य के मालवन में समुद्र तट पर स्थित एक प्राचीन किला है जो अरब सागर में एक टापू पर स्थित है। यह भव्य किला 48 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसकी विशाल दीवारें समुद्र की दुर्घटनाग्रस्त लहरों के खिलाफ खड़ी हैं। किले के मुख्य द्वार को इस तरह छुपाया गया है कि कोई भी इसे बाहर से पहचान न सके। सिंधुदुर्ग किला मराठा दूरदर्शिता और साधन संपन्नता का एक ठोस उदाहरण है। यह शक्तिशाली किला न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण आकर्षण है, बल्कि आसपास के परिदृश्य की प्राकृतिक सुंदरता इसे एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनाती है। शक्तिशाली अरब सागर के ठीक बीच में फैला यह किला एक मनमोहक नजारा प्रस्तुत करता है अपने इन्ही आकर्षणों के दम पर यह किला हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है।

किला sindhudurg महाराष्ट के सिंधुदुर्ग जिले के मालवन तालुका के समुद्र तट से दूर अरब सागर के कोकण क्षेत्र में स्थित है। और वो दक्षिण मुम्बई से करीबन 450 किमी दूर है। यह किला मालवन तट के चट्टानी द्वीप पर उपस्थित है।

sindhudurg information है की आप जगह पर जाने के लिए आपको नाव से जाना होगा। और तो और इस सिंधुदुर्ग जिले का सिंधुदुर्ग किले के नाम पर से ही रखा गया है। उसका मतलब होता है समृद्ध किला। सिंधुदुर्ग जिले में करीबन 37 किले उपस्थित है वो महाराष्ट्र में एक ही जगह उपस्थित अधिक किलो की संख्या है। उस जगह पर अनेक किले उपस्थित है जैसे की जमदुर्ग ,भुईकोट और गिरी ऐसे बहुत ही है।

सिंधुदुर्ग किला का इतिहास – History of Sindhudurg Fort in Hindi

सिंधुदुर्ग किला महाराष्ट्र का एक ऐतिहासिक किला है। सिंधुदुर्ग किला के इतिहास पर नजर डालने पर हम पाते है की सिंधुदुर्ग किला का निर्माण सन् 1664 में छत्रपति शिवाजी द्वारा अंग्रेजी, डच, फ्रेंच और पुर्तगाली व्यापारियों के बढ़ते प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करने और सिद्दी के उदय को रोकने के उद्देश्य से किया गया था। सिंधुदुर्ग किला शुरू में 1765 तक मराठा साम्राज्य की कमान में था। लेकिन 1792 में ब्रिटिश संधि के अनुसार यह किला ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया।

sindhudurg fort सिंधुदुर्ग जिले में एक छोटे से टापू में स्थित है और वह चारो तरफ से अरब सागर से घिरा हुवा है। और यह सिंधुदुर्ग किला उस समय मराठाओ का मुख्यालय था। जहा पर सम्पूर्ण युद्ध की तयारी करते थे और तो और सिंधुदुर्ग किला उनका सुरक्षा गुह भी हुवा करता था। छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा बनवाया गया यह किला करीबन 3 सालो में बन कर तैयार हुवा था।

आर्किटेक्चर ऑफ़ सिंधुदुर्ग फोर्ट – Architecture of Sindhudurg Fort in Hindi

सिंधुदुर्ग किले की ताकत इसकी अडिग इंजीनियरिंग में निहित है, जिसने स्वदेशी सामग्रियों का उपयोग अपनी सर्वोत्तम संपत्तियों में किया है। किले को बनाने के लिए मुख्य सामग्री गुजरात से लाई गई रेत थी, जबकि किले की नींव सैकड़ों किलोग्राम सीसे से रखी गई थी। किले का परिसर 48 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें 3 किलोमीटर लंबा बुलेवार्ड है।

उसमे क़रीबन 100 वास्तुकारों वह पुर्तगाल से थे और तो और 3000 मजदूर उसमे काम करते थे। sindhudurg killa 48 एकड़ की सम्पूर्ण जमीन पर मजबूती से खड़ा है और वो 12 फिट मोटा और 29 फुट ऊँचा है साथ ही साथ वह 2 मिल तक फैला हुवा है। किले की नींव के साथ साथ उसको मजबूती से तैयार करने में करीबन 4000 लोहे के टीलों के इस्तेमाल से तैयार किया गया था।

सिंधुदुर्ग किले की दीवारें 30 फीट ऊंची और 12 फीट मोटी हैं, जिससे यह व्यावहारिक रूप से असंभव पैमाना है। किले के मुख्य द्वार को इस तरह बनाया गया है कि कोई भी इसे बाहर से पहचान न सके। सिंधुदुर्ग किले में 42 बुर्ज भी हैं, जो अभी भी ऊंचे हैं और पद्मगढ़, राजकोट और सरजेकोट किले जैसे कई छोटे किलों से घिरे हैं। साथ मराठा वीर छत्रपति को समर्पित एक छोटा मंदिर भी किले की सीमा के अन्दर स्थित है।

सिंधुदुर्ग किला की टाइमिंग – Timings of Sindhudurg Fort in Hindi

यदि आप अपने फ्रेंड्स या फैमली के साथ सिंधुदुर्ग फोर्ट की ट्रिप को प्लान कर रहे हैं और अपनी ट्रिप पर जाने से पहले टाइमिंग सर्च कर रहे हैं तो हम आपके बता दे सिंधुदुर्ग किला सप्ताह के सातों दिन सुबह 8.00 बजे से शाम 6.00 बजे तक खुला रहता है। आप इस दौरान कभी भी यहाँ घूमने आ सकते है। एक बात का और विशेष ध्यान दें सिंधुदुर्ग फोर्ट ट्रिप के लिए कम से कम 2-3 घंटे का समय जरूर निकालें।

शाखा वाले नारियल के पेड़ :
सिंधुदुर्ग किले में शाखा वाले नारियल के पेड़ है और उसमे फल भी आते है।

आपको बता देकी पूरी दुनिया में ऐसे शाखा वाले नारियल के वृक्ष कही भी देखने को नहीं मिलगे। और यह इस जगह की विशेषता है।

सिंधुदुर्ग किला की एंट्री फ़ीस – Entry Fee of Sindhudurg Fort in Hindi

एंट्री फ़ीस ऑफ़ सिंधुदुर्ग फोर्ट सर्च करने वाले पर्यटकों को बता दे सिंधुदुर्ग किला घूमने के लिए कोई भी प्रवेश शुल्क या फीस नही हैं यहाँ बिना किसी फीस का भुगतान आराम से घूम सकते हैं।

किले में स्थित कुएं :
आपको बतादे की इस सुन्दर सिंधुदुर्ग किले में 3 बहुत ही सुन्दर जलाशय भी उपस्थित है।

वह कभी नहीं सूखते है और तो और यह गर्मी के मौसम में भी नहीं सूखते है।

परन्तु आसपास के गांव के सम्पूर्ण जलाशय पूरी तरह से सुख जाते है

सिंधुदुर्ग किला के आसपास घूमने की जगहें – Places To Visit Near Sindhudurg Fort in Hindi

यदि आप मालवन में सिंधुदुर्ग फोर्ट घूमने जाने वाले हैं तो हम आपको बता दे मालवन में सिंधुदुर्ग किला के अलावा भी घूमने के लिए कई प्रसिद्ध मंदिर, समुद्र तट और कई पर्यटक स्थल मौजूद है जिन्हें आप अपनी यात्रा के दौरान घूमने जा सकते

रॉक गार्डन
रामेश्वर मंदिर
सुनामी द्वीप
श्री वागेश्वर मंदिर
मालवन समुद्री अभयारण्य
तलाशिल तोंदावली बीच
जय गणेश मंदिर
वेंगुर्ला मालवन बीच
सतेरी देवी मंदिर

16वीं शताब्दी में पानी के नीचे का मार्ग :
आपको बता दे की पानी के निचे का सम्पूर्ण मार्ग अब भी एक विस्मय वाली बात है। छत्रपति शिवाजी महाराज के शासन काल के दौरान 16 वी शताब्दी में भी इसका निर्माण इस समय की कार्यकुशलता को बहुत ही अच्छी तरह से दिखाता है। यह रास्ता किले के मंदिर में उपस्थित है और वो एक जलाशय की जैसे ही प्रतीत करता है। और तो और यह रास्ता किले की बिलकुल निचे 3 किलोमीटर तक जाता है। और तो और यह समृद्ध में 12 किलोमीटर निचे तक का है।

सिंधुदुर्ग किला घूमने जाने का सबसे अच्छा समय – Best time to visit Sindhudurg Fort in Hindi

वैसे तो आप साल की किसी भी समय यहाँ घूमने आ सकते है लेकिन अक्टूबर और फरवरी के बीच के सर्दियों के महीने सिंधुदुर्ग किला और मालवन घूमने के लिए सबसे अच्छे महीने हैं। ठंडी रातों और आरामदायक दिनों के साथ, इस समुद्र तट शहर में सर्दी एक अविस्मरणीय छुट्टी का वादा करती है। जुलाई और सितंबर के बीच का मानसून मालवन जाने के लिए सबसे कम अनुकूल समय है, क्योंकि बारिश बाहरी गतिविधियों में बाधा डालती है। इसीलिए बेहतर होगा बारिश और गर्मी के मौसम को छोड़कर यहाँ घूमने आयें।

आप अगर sindhudurg fort में पहली बार घूमने जा रहे हो तो आपको भाग्य ही यहाँ का दिल्ली दरवाजा दिखाए देगा। आपको बतादे की यह पर नया कोय व्यक्ति इस स्थान पर नाव में बैठकर जा सकते है। यहा जो वायु मार्ग शिवाय यहाँ जाने के लिए एकलौता उपाय है। fort sindhudurg चट्टानों से बहुत जोर से टकराएगा और वो वो बहुत ही आसानी से बिलकुल नहीं दिखाए देगा।

सिंधुदुर्ग किला की यात्रा में रुकने के लिए होटल्स – Hotels in Malvan in Hindi

यदि आप सिंधुदुर्ग किला और मालवन के अन्य पर्यटक स्थलों की यात्रा में रुकने के लिए होटल्स सर्च कर रहे हैं तो हम आपको बता दे मालवन में आपको सस्ते से लेकर कई महंगे और लग्जरी होटल आसानी से मिल जायेंगे। इन होटल को आप अपने बजट अनुसार ऑनलाइन अथवा होटल में चेक-इन करते समय बुक कर सकते हैं।

मालवन कोणार्क रेजीडेंसी (Malvan Konark Residency)
होटल चिवला बीच(होटल चिवला बीच)
होटल अंजलि लॉज मालवन (Hotel Anjali Lodge Malvan)
सामंत बीच रिज़ॉर्ट (Samant Beach Resort)

आपको बतादे की जो सिंधुदुर्ग किले से परिचित होगा वही बिलकुल आराम से इस किले में प्रवेश द्वार से प्रवेश करने में सफल होते है। और यह बहुत दिमाग और हिम्मत का खेल है। fort sindhudurg में बहुत ही शानदार और यूनिक वास्तुकला के साथ इस जगह पर बहुत सारे मंदिर स्थित है। वह सिंधुदुर्ग किले को दूसरे किलो से अलग बनाते है। यहाँ पर भवानी देवी का मंदिर ,हनुमान जी का मंदिर और जरिमारी को समर्पित किया हुआ है।

सिंधुदुर्ग किला मालवन केसे पहुचें – How To Reach Sindhudurg Fort Malvan in Hindi


चूंकि सिंधुदुर्ग किला एक द्वीप पर स्थित है, इसीलिए किले तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता घाटों के माध्यम से है जो मालवन तट से काफी आसानी से उपलब्ध हैं। फेरी एक राउंड ट्रिप के लिए INR 37 लेती है और इस आकर्षण तक पहुंचने में 15 मिनट का समय लेती है। लेकिन इससे पहले आपको मालवन पहुचना होगा जिसके लिए आप ट्रेन, फ्लाइट, और सड़क मार्ग से यात्रा करके जा सकते है।

तो आइये डिटेल में जानते हैं की हम मालवन केसे जा सकते है –

फ्लाइट से मालवन केसे पहुचें – How To Reach Malvan By Flight in Hindi

यदि आप फ्लाइट से ट्रेवल करके सिंधुदुर्ग किला मालवन घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो इसके लिए आप डाबोलिम हवाई एयरपोर्ट गोवा या मुंबई एयरपोर्ट के लिए ले सकते है जो मालवन के दो सबसे नजदीकी हवाई अड्डे है। हालाकि डाबोलिम हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी बहुत कम है इसीलिए बेहतर होगा आप मुंबई एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरे। एक बार जब आप मुंबई एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं तो एक टेक्सी, केब या बस से मालवन जा सकते है, और मालवन पहुचने के बाद फेरी लेकर सिंधुदुर्ग किला जा सकते है।

ट्रेन से मालवन केसे जायें – How To Reach Malvan By Train in Hindi

मालवन के लिए कोई सीधी रेल कनेक्टविटी भी नही है। मालवन का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन स्टेशन कुडाल है जो मालवन से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित है।

सभी मंदिरो के साथ साथ यहां पर पूरी दुनिया का सबसे खास मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। वह भगवान शिवजी को समर्पित है। यहा पर भगवान शिवजी के हस्त चिन्ह के साथ साथ पद चिन्ह भी है। सिंधुदुर्ग किले के एक पत्थर की पटिया पर जड़े हुए है। यात्री इस जगह पर अंडर वॉटर खेलो के बहुत ही मजे ले सकते है। सिंधुदुर्ग किला हर आयामों से बिना अनेक शक के एक अनूठा और अद्वितीय किला है। इस किले की सम्पूर्ण विशेषताएं आपका मन मोह लेती है।

सड़क मार्ग से मालवन केसे पहुचें – How To Reach Malvan By Road in Hindi


सिंधुदुर्ग किला मालवन जाने के लिए बस या सड़क मार्ग से यात्रा करना सबसे आरामदायक और पसंदीदा विकल्प है जिसे लगभग सभी पर्यटक पसंद करते है। मालवन कसोल नामक कस्बे से 35 किमी की दूरी पर स्थित है जो मुंबई-गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग NH17 पर स्थित है। मालवन के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों से बसें भी संचालित की जाती है जिनसे कोई भी यात्रा करके मालवन और मालवन सिंधुदुर्ग किला जा सकता है।

इस आर्टिकल में आपने सिंधुदुर्ग किला का इतिहास और इसकी यात्रा से जुड़ी जानकारी को जाना है आपको हमारा यह लेख केसा लगा हमे कमेंट्स में जरूर बतायें।

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