विकास के साथ विरासत भी: उड़ान योजना के तहत देश के प्राचीन शहरों को मिल रही कनेक्टिविटी

नई दिल्ली न्यूज़ भारत



केंद्र सरकार विकास के साथ विरासत को भी साथ लेकर चल रही है। ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हवाई कनेक्टिविटी के तहत केंद्र सरकार आरसीएस-उड़ान (क्षेत्रीय संपर्क योजना- उड़े देश का आम नागरिक) योजना चला रही है। इस योजना के तहत अब तक 350 से अधिक नए शहर जुड़ने वाले हैं, जबकि 200 पहले से ही जुड़े हुए हैं। खास बात ये है कि इस योजना के जरिए देश के प्राचीन शहरों को कनेक्टिविटी प्रदान की जा रही है, जिनका हमारे देश के इतिहास पर गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभाव है। इसी क्रम में झारखंड के देवघर को भी उड़ान योजना के तहत एयरपोर्ट से जुड़ रहा है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देवघर हवाई अड्डा उड़ान योजना के तहत रणनीतिक रूप से स्थित है, जो संथाल क्षेत्र और पटना, कोलकाता और बागडोगरा को विमानन कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह बिहार के भागलपुर और जमुई जिलों के लोगों को सेवा प्रदान करेगा।





देवघर को मिलेगा हवाई अड्डा

झारखंड स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। बाबा वैद्यनाथ के लिए सीधा संपर्क उपलब्ध कराने के एक कदम के रूप में पीएम मोदी 12 जुलाई को देवघर हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इसे अनुमानित रूप से लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन की क्षमता सालाना लगभग पांच लाख यात्रियों की है। देवघर एयरपोर्ट से शुरुआत में कोलकाता के लिए हवाई सेवा शुरू होगी और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा की भी सुविधा मिलने लगेगी। वैसे झारखंड में इससे पहले रांची का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है, अब देवघर एयरपोर्ट राज्य का दूसरा एयरपोर्ट है।





क्या है उड़ान योजना

उड़ान योजना 2016 में शुरू की गई। इसका उद्देश्य उड़े देश का आम नागरिक के विजन का पालन करते हुए, श्रेणी II और III शहरों में एक उन्नत विमानन बुनियादी ढांचे और उनके हवाई संपर्क के साथ आम आदमी की आकांक्षाओं को पूरा करना है। 5 वर्षों की छोटी सी अवधि में, करीब 419 उड़ान मार्ग 67 अंडरसर्व्ड,अनसर्व्ड हवाई अड्डों को जोड़ते हैं, जिनमें हेलीपोर्ट्स और वाटर एयरोड्रोम शामिल हैं। इससे 92 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। इस योजना के तहत 1 लाख 79 हजार से अधिक उड़ानें भरी जा चुकी हैं। उड़ान योजना से पहाड़ी राज्यों, उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों और द्वीपों सहित पूरे भारत के कई क्षेत्रों को अत्यधिक लाभ पहुंचा है।



केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई उड़ान योजना का देश की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है और उद्योग हितधारकों विशेषकर एयरलाइंस ऑपरेटरों और राज्य सरकारों की ओर से भी बहुत ही अच्छी प्रतिक्रिया देखी गई है। इस योजना के तहत 350 से अधिक नए शहरों के जोड़े अब जुड़ने वाले हैं, 200 पहले से ही जुड़े हुए हैं और भौगोलिक रूप से देश की लंबाई और चौड़ाई में व्यापक रूप से फैले हुए हैं। इसके साथ ही ये संतुलित क्षेत्रीय विकास भी सुनिश्चित करते हैं जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक विकास होता है और स्थानीय आबादी को रोजगार भी मिलता है।



देवघर से पहले कुशीनगर, गोरखपुर और वाराणसी के बीच उड़ान सेवा के अलावा सहारनपुर, अलीगढ़, आजमगढ़, नोएडा, अयोध्या के अलावा नॉर्थ ईस्ट समेत देश के कई अलग-अलग राज्यों में हवाई संपर्क को बढ़ाया जा रहा है।



उड़ान के तहत ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट

इस योजना से सिक्किम में गंगटोक के पास पाकयोंग, अरुणाचल प्रदेश में तेजू और आंध्र प्रदेश में कुरनूल जैसे नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का विकास हुआ। इस योजना से गैर-मेट्रो हवाई अड्डों के घरेलू यात्री हिस्से में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।





दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार

नागरिक उड्डयन मंत्रालय वर्ष 2026 तक उड़ान आरसीएस योजना के तहत 1,000 नए मार्गों के साथ भारत में 2024 तक 100 नए हवाई अड्डों का निर्माण करने की योजना बना रहा है और यह इसके लिए प्रतिबद्ध है। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में संसद में बताया कि 2014 तक, हमारे देश में केवल 74 हवाई अड्डे बनाए गए थे और पिछले सात वर्षों में अकेले 66 नए हवाई अड्डे विकसित किए गए हैं। इस तरह, हमने उस क्षमता को दोगुना कर दिया है। उनका मानना है कि वर्ष 2025 तक देश में कुल 220 एयरपोर्ट होंगे। उड़ान योजना के तहत वर्ष 2024 तक 100 नए हवाई अड्डे का निर्माण करने का लक्ष्य है, जिनमें से 66 हवाईअड्डे पहले ही बन चुके हैं।

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