वारणासी को बनारस और काशी क्यों कहा जाता है।

भारत रोचक तथ्य

वाराणसी , भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का प्रसिद्ध नगर ‘बनारस’ इसे और ‘काशी’ के नाम से भी जाना जाता हैं। इसे हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र नगरों में से एक माना जाता है और इसे अविमुक्त क्षेत्र भी कहा जाता है। इसके अलावा बौद्ध एवं जैन धर्म में भी इसे पवित्र माना जाता है। यह संसार के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक और भारत का प्राचीनतम बसा शहर है

पवित्र नदी गंगा के तट पर बसा धार्मिक शहर वाराणसी, दुनिया का सबसे पुराना शहर माना जाता है। जिसके अनुसार यह भगवान शिव जी और देवी पार्वती का निवास स्थल हुआ करता था। ऐसा कहा जाता है कि जो भी सबसे आखिर तक यहाँ ज़िंदा रहेगा उसे ज़रूर ही मोक्ष की प्राप्ति होगी

वारणासी को बनारस और काशी भी कहा जाता है। ये शहर, गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है।

यह एक बहुत ही बड़ा धार्मिक शहर माना जाता है।
यहाँ हिंदू, जैन, और बुद्ध धर्म प्रचलित है।
वारणासी का मुख्य भाषा बनारासी और भोजपूरी है।
ये शहर भारत का एक मुख्य औद्योगिक केंद्र भी माना जाता है।
वारणासी उत्तर भारत का सांस्कृतिक केंद्र भी रहा है।

कहा जाता है कि वारणासी की स्थापना भगवान शिव ने की थी।
महाभारत के पांडव भी, शिव की खोज करते हुए, इस शहर में पहुँचे।
गौतम बुद्ध ने यहाँ बुद्ध धर्म की स्थापना की।
भक्ति काल के कई मुख्य लोगों का जन्म वारणासी में हुआ था। कबीरदास उनमें से एक हैं।
सन् 1507 के महाशिवरात्री के समय में गुरु नानक इस शहर में आए, और सिख धर्म फैलाए।
औरंगज़ेब के राज में, वारणासी के कई सारे मंदिर तुड़वा दिए गए थे।
अग्रेज़ों के राज में, वारणासी को एक नया राज्य बना दिया गया था, जिसकी राजधानी रामनगर थी।

रेशम कपड़े को सीना, यहाँ का मुख्य काम है। ज़्यादातर मुसलमान इन कामों में व्य्सथ रहते हैं।
ये शहर इसके बनारसी साड़ियों के लिए जाना भी जाना जाता है।
पर्यटन यहाँ का दूसरा पैसा कमाने का मुख्य ज़रिया है।
कई लोग वारणासी, यहाँ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को देखने आते हैं।
यहाँ पुरे देश और दुनियाँ से लोग घूमने के लिए आते हैं ।

ऐसा माना जाता है कि जब पृथ्वी का निर्माण हुआ तब रौशनी की सबसे पहली किरण काशी में ही पड़ी। जैसा की कहा जाता है कि भगवान शिव जी काशी के परमात्मा हैं, इसलिए इस वजह से अन्य ग्रह भी अपनी मर्ज़ी से यहाँ पर कुछ नहीं कर सकते थे जब तक कि शिव जी का आदेश न हो। ऐसा माना जाता है कि शनि देवता जब भगवान शिव जी की खोज में काशी आए तब वे उनके मंदिर में लगभग साढ़े सात सालों तक प्रवेश नहीं कर पाए। आप जब भी कभी काशी के विश्वनाथ मंदिर में जायेंगे, मंदिर के बाहर ही आपको शनि देव जी का मंदिर दिखेगा।

एक महत्वपूर्ण धार्मिक शहर होने के साथ-साथ, वाराणसी शिक्षा और संस्कृति का भी मुख्य केंद्र है। शहर का बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी(बी.एच.यू) एशिया का सबसे बड़ा यूनिवर्सिटी है।

अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता से परे शहर को प्राचीन काल से ही वाणिज्य और व्यापार का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है। यह मुख्यतः सोने और चाँदी के किये हुए काम और बनारसी सिल्क साड़ियों के लिए जाना जाता है।

कई बॉलीवुड फिल्म में इस शहर की खूबसूरती और संस्कृति को पूरी तरह से कैद किया गया है। आये दिन आप किसी भी टी.वी. सीरियल में इस शहर को देख सकते हैं। शहर का गंगा घाट शूटिंग के लिए सबसे मनपसंद जगह है। रांझणा, लागा चुनरी में दाग आदि जैसी कई बड़ी-बड़ी फ़िल्में यहाँ शूट की गई हैं।

यहाँ का सबसे यूनिक रिवाज़ यह सुनने में भले ही अजीब है पर हर साल वाराणसी में इस रिवाज़ का पालन किया जाता है। यहाँ हर साल अश्वमेध घाट पर बारिश के मौसम में मेंढकों की शादी कराई जाती है। पंडित मेंढकों की शादी के सारे अनुष्ठानों को पूरा कर मेंढकों को नदी में छोड़ देते हैं।

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