लॉकडाउन में भी भारत में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं

भारत

कोरोना महामारी संकट के चलते भारत में पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से देशव्यापी लॉकडाउन है और लोगों के इधर-उधर आने-जाने में सख्ती बरती जा रही हैलोग गाह्रो में कैद है. इसके बावजूद महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा में कमी नहीं आ रही है.

लॉकडाउन की वजह से लोगों का इधर-उधर आना-जाना भले ही कठिन हो गया हो लेकिन अपराधों में, खासकर महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों में कमी नहीं आ रही है. हालांकि यह दावा किया जा रहा है कि अपराधों में कमी आई है लेकिन आए दिन हो रही ऐसी घटनाएं इन दावों पर पानी फेरती नजर आ रही हैं. दिल्ली पुलिस का दावा है कि दिल्ली में जघन्य अपराधों में पिछले वर्ष की तुलना में 70 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है. पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल एक अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच जघन्य अपराध के 221 मामले दर्ज किए गए थे जबकि इसी दौरान साल 2020 में ऐसे सिर्फ 66 मामले ही दर्ज किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, पिछले साल 1-15 अप्रैल के बीच कुल 10,579 मामले दर्ज किए गए जबकि इस वर्ष इसी अवधि में कुल 2,574 मामले दर्ज किए गए.

कोरोना महामारी संकट के चलते भारत में पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से देशव्यापी लॉकडाउन है और लोगों के इधर-उधर आने-जाने में सख्ती बरती जा रही हैलोग गाह्रो में कैद है. इसके बावजूद महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा में कमी नहीं आ रही है.

पूरी दुनिया से लॉकडाउन के दौरान अपराधों के कम होने की खबर सामने आ रही है, लेकिन भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध अभी भी पहले की तरह ही जारी हैं. ताजा घटनाएं यूपी के अलीगढ़ और राजस्थान के सवाई माधोपुर से आई हैं जहां लड़कियों के साथ गैंगरेप की घटना हुई.

कानून से अलग पंचायती सजा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में भी एक युवती के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है. नाबालिग लड़की के साथ रेप करने वाले उसी गांव के ही दो लड़के थे. गांव का मामला होने के कारण दो दिन तक इस बारे में पंचायत हुई और पंचायत ने अभियुक्तों को अजीबोगरीब सजा सुनाई.

गांव के ही एक व्यक्ति दिनेश राजपूत ने बताया, “पंचायत ने दोनों अभियुक्तों को पांच-पांच जूते मारने और फिर उनका मुंह काला करने की सजा सुनाई थी. पंचायत के आदेश पर ऐसा किया भी गया लेकिन इसके बाद उन दोनों को बरी कर दिया गया. पंचायत में यह भी तय हुआ कि अब मामला पुलिस में नहीं जाएगा.”

पंचायत के फैसले से आहत होकर युवती ने कथित तौर पर अपने घर पर ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल शर्मा ने बताया, “पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है. दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पंचायत की बात भी संज्ञान में आई है. पूरे मामले की जांच की जा रही है. जो भी दोषी होंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.”

दूसरी घटना :-

वहीं दूसरी ओर पुलिस उपाधीक्षक पार्थ शर्मा ने बताया कि महिला ने शुक्रवार को शिकायत दर्ज कराई थी जिसके आधार पर तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है. उनके मुताबिक, महिला का मेडिकल कराकर बयान दर्ज किया गया है. बताया जा रहा है कि महिला जयपुर में किराए के मकान में रहती है. लॉकडाउन के कारण पिछले एक महीने से वह सवाई माधोपुर में थी. पिछले दिनों उसने पैदल ही जयपुर जाने का फैसला किया लेकिन पुलिस ने उसे रोक लिया और एक सरकारी स्कूल के क्वैरेंटीन सेंटर में रख दिया. महिला का आरोप है कि यहीं पर उसके साथ कुछ लोगों ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया.

इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “महिला को रात में एक सरकारी स्कूल में ठहराया गया. पुलिस वाले ग्रामीणों से यह कहकर चले आए कि महिला को अकेला न छोड़ा जाए क्योंकि स्कूल पूरी तरह से खाली था और सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा करना ठीक नहीं था.

लेकिन गांव वाले इस संदेह में वहां से चले आए कि महिला कोरोना संक्रमित है. उसी रात में यह घटना घट गई. पुलिस वालों को खुद वहां ड्यूटी देनी चाहिए थी.” फिलहाल इस मामले में एक हेड कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है और सवाई माधोपुर के कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं.

अपराधों के कम होने का दावा

लॉकडाउन की वजह से लोगों का इधर-उधर आना-जाना भले ही कठिन हो गया हो लेकिन अपराधों में, खासकर महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों में कमी नहीं आ रही है. हालांकि यह दावा किया जा रहा है कि अपराधों में कमी आई है लेकिन आए दिन हो रही ऐसी घटनाएं इन दावों पर पानी फेर रही हैं. दिल्ली पुलिस का दावा है कि दिल्ली में जघन्य अपराधों में पिछले वर्ष की तुलना में 70 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है. पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल एक अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच जघन्य अपराध के 221 मामले दर्ज किए गए थे जबकि इसी दौरान साल 2020 में ऐसे सिर्फ 66 मामले ही दर्ज किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, पिछले साल 1-15 अप्रैल के बीच कुल 10,579 मामले दर्ज किए गए जबकि इस वर्ष इसी अवधि में कुल 2,574 मामले दर्ज किए गए.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक हत्या और बलात्कार के मामलों में 75 प्रतिशत से भी अधिक की कमी आई है. कुछ ऐसे ही आंकड़े यूपी पुलिस के भी हैं. यूपी पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, हत्या और अपहरण जैसे अपराधों में पचास प्रतिशत तक की कमी के अलावा वाहन चोरी और छिनैती जैसी घटनाओं में भी कमी आई है. बावजूद इसके, महिलाओं के साथ गैंगरेप की घटनाएं आए दिन अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published.