रात के अंधरे में 570 किलोमीटर की दूरी, कैस होगी पूरी |

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ऐसी आफिस, गाडी और घरों में चैन की नींद सोने वाले जनप्रतिनिधि और प्रशासन के जिम्मेदार क्या जाने इनका दर्द



सतना| यह तस्वीर सिर्फ़ सतना की नहीं पूरे देश की है, आपको विचलित कर सकती है, लेकिन हकीकत यही है| सरकार और प्रशासन कितने भी दावे करे कि सब की मदद की जाएगी लेकिन हकीकत इससे उलट है| कुछ जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मदद की जा रही है, लेकिन बड़े पदों में बैठे जिम्मेदार और जनप्रतिनिधि सिर्फ निधि का पैसा देकर समाज सेवा का ढोंग रच रहे हैं जबकि हालात इससे उलट हैं|

दोहरी मार


देश में 21 दिन के लिए हुए लॉक डाउन से मजदूर और गरीब तबके के लोगों को कई तरह की मार झेलनी पड़ रही है| एक तो इनके पास रोजगार नहीं वहीं दूसरी तरह अपने घर तक पहुंचने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर पैदल चलना पड़ रहा है|

कैसे पूरी कर पायेंगे 570 किलोमीटर की दूरी

24 लोग सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने के लिए मजबूर है, व्यवस्था पर भी रो रहे हैं शनिवार रात करीब 11 बजे 24 लोगों का ग्रुप सतना से बरेली जा रहा है, जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि प्रिज्म सीमेंट से पैदल चलकर सतना आए, यहां चेकअप कराने के बाद अब बरेली जा रहे हैं| खाना खिलाने वालो का शुक्रिया बाकी भगवान भरोसे |

 मदद के विषय में पूछने पर बताया कोई मदद नहीं किया कुछ लोगों ने खाना जरूर दिया उनका शुक्रगुजार है|
भगवान चाहेगा तो घर पहुंच जाएंगे|

 प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन की लापरवाही


 प्रिज्म सीमेंट से चलकर बरेली जाने वाले मजदूरों ने बताया कि प्रबंधन ने कोई मदद नहीं की, काम भी नहीं है और पैसे भी नहीं हैं| ठेकेदार से जब यहीं रुकने की बात की तो बोला कि अपने गांव चले जाओ, अभी कोई मदद नहीं हो सकती| ऐसे में प्रबंधन की सोच दर्शाती है कि यह सिर्फ मजदूरों का शोषण करना जानते हैं| जब इन पर विपदा आती है तो इंसानियत मर जाती है|

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