मिसाल: समर्पण-साहस और जुनून से बताया…इंसानियत अभी जिंदा है…

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कोरोना महामारी के दौरान इंसानी फितरत नजर आई। लूट-खसोंट करने वाले चेहरे दिखाई दिए तो इन हैवानों के बीच चंद लोग इस तरह उभरे, जैसे कि वे फरिश्ते हों। उन्होंने अपने परिवार की परवाह तक नहीं की। लोगों की मदद के लिए खुद को झोंक दिया। यहां तक कि अपना घर, जगह और वक्त तक कुर्बान कर दिया। उन्होंने अपने समर्पण, साहस और जुनून से समाज को बताया कि कोरोना भले ही कितना खतरनाक क्यों न हो, लेकिन इंसानियत अभी जिंदा है…


कोरोना महामारी से जूझने का काम अगर किसी ने सबसे ज्यादा किया तो वे हमारे डॉक्टर्स हैं। उन्होंने मरीजों का इलाज करने के दौरान अपने परिवार की परवाह तक नहीं की। ऐसे ही फरिश्तों में एक हैं महाराष्ट्र की डॉक्टर प्रज्ञा। उन्होंने बालाघाट से नागपुर का सफर स्कूटी से तय किया और कोविड अस्पताल में ड्यूटी करने पहुंच गईं। वह लगातार दो अस्पतालों में काम कर रही हैं और मरीजों की जान बचा रही हैं। इसके अलावा पूरे देश में हजारों ऐसे डॉक्टर्स हैं, जिन्होंने कोरोना काल में लगातार कई हफ्ते तक ड्यूटी की। इस दौरान वे मरीजों को छोड़कर अपने घर तक नहीं गए।

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