भारत, US, जापान और ऑस्ट्रेलियाई नेवी ने किया संयुक्त युद्धाभ्यास

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भारत, US, जापान और ऑस्ट्रेलियाई नेवी ने किया संयुक्त युद्धाभ्यास, चीन के…. छूटे पसीने।
अक्टूबर महीने की शुरुआत में भी QUAD देश जापान में बैठक कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति के लिए चीन को कड़ा संदेश दे चुके हैं. सभी देश आपसी सहयोग पर जोर देते रहे हैं. ऐसे में मालाबार युद्धाभ्यास की महत्ता काफी ज्यादा बढ़ गई है.

भारत, US, जापान और ऑस्ट्रेलियाई नेवी के इस युद्धाभ्यास से क्यों चिंतित हुआ चीन
इस युद्धाभ्यास को लेकर चीन की भौहें तन सकती हैं क्योंकि पहले भी वो इस तरह की एक्सरसाइज की आलोचना करता रहा है.
नई दिल्ली. भारत, जापान और अमेरिका की नेवी के मालाबार युद्धाभ्यास का हिस्सा अब ऑस्ट्रेलिया भी होगा. ये युद्धाभ्यास तीन दिन का होगा. माना जा रहा है कि इस युद्धाभ्यास को लेकर चीन की भौहें तन सकती हैं क्योंकि पहले भी वो इस तरह की एक्सरसाइज की आलोचना करता रहा है.

1992 में हुई थी शुरुआत-

दरअसल मालाबार नेवी अभ्यास की शुरुआत 1992 में हुई थी. तब यह भारत और अमेरिकी नेवी के बीच एक ट्रेनिंग इवेंट के तौर पर शुरू हुई थी. जापान इसका हिस्सा 2015 में बना लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने इसमें 2007 के बाद कभी हिस्सा नहीं लिया. माना जा रहा है कि इस साल ये एक्सरसाइज बंगाल की खाड़ी में की जा सकती है. हालांकि अभी तक इसकी डेट नहीं फाइनल हुई है.

क्यों महत्वपूर्ण है मालाबार युद्धाभ्यास
ये अभ्यास महत्वपूर्ण इसलिए भी हो गया है क्योंकि इसमें QUAD के सभी चार देश इसमें शामिल हैं. माना जा रहा है कि इन चारों लोकतांत्रिक देशों की ये नेवी एक्सरसाइज चीन की दादागीरी को जवाब की तरह है.

गौरतलब है कि भारत बीते कई महीने से चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गंभीर विवाद में उलझा हुआ है. भारत के अलावा अन्य तीन देश भी चीन के साथ किसी न किसी रूप में विवाद में उलझे हुए हैं. भारत की तरफ से इस बार अभ्यास में बड़े युद्धपोत हिस्सा ले सकते हैं. वहीं अमेरिका का युद्धपोत Nimitz इस वक्त गल्फ में और रोनाल्ड रीगन बंगाल की खाड़ी में मौजूद है. माना जा रहा है कि ये दोनों पोत भी अभ्यास का हिस्सा हो सकते हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया की तरफ से हेस्ट्रॉयर हॉबर्ट शामिल हो सकता है.

इस महीने की शुरुआत में मिले थे QUAD देश
इससे पहले अक्टूबर महीने की शुरुआत में भी QUAD देश जापान में बैठक कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति के लिए चीन को कड़ा संदेश दे चुके हैं. सभी देश आपसी सहयोग पर जोर देते रहे हैं. ऐसे में मालाबार युद्धाभ्यास की महत्ता काफी ज्यादा बढ़ गई है.

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