देश का यह राज्य बनाने जा रहा 25 करोड़ पौधरोपण का रिकॉर्ड

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पीएम मोदी के काम करने का मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास और गरीब कल्याण’ है। वहीं उनके कामकाज का वैज्ञानिक विश्लेषण करें तो उनके प्रत्येक काम में पर्यावरण संरक्षण का मूल पहलू भी जुड़ा हुआ है। हम सब जानते हैं कि न केवल मानव जाति बल्कि पूरी शृष्टि का सर्वांगीण विकास पर्यावरण के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण सबसे अहम मुद्दा है। इसी दिशा में भारत सरकार बेहद गंभीरता के साथ पर्यावरण को लेकर कई कदम उठा चुकी है। जी हां, पिछले 8 साल के पीएम नरेंद्र मोदी के काम और उनकी योजनाओं का अगर बारीकी से अध्ययन किया जाए तो उनमें पर्यावरण संरक्षण जुड़ा हुआ नजर आता है।

जैसे स्वच्छ भारत अभियान, नीम कोटेड यूरिया का इस्तेमाल, उज्ज्वला योजना, पेट्रोलियम में इथेनॉल के प्रयोग की योजना, ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने की योजना, एलईडी बल्ब के प्रयोग को बढ़ावा देने की योजना, वेस्ट टू वेल्थ योजना, नमामि गंगे योजना, मिट्टी संरक्षण और स्वाइन हेल्थ कार्ड योजना नदियों के संरक्षण की योजना, गोवर्धन योजना और अभी हाल में लागू की गई सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन की योजना, इन तमाम योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण शामिल है।

मिशन 35 करोड़ के तहत मना रहा वन महोत्सव

केवल इतना ही नहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर वनों के विस्तार को लेकर भी कार्य कर रही हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार ने पौधरोपण का एक बड़ा टारगेट सैट किया है, जिसके अंतर्गत मंगलवार 5 जुलाई को 25 करोड़ पौधरोपण का रिकॉर्ड कायम किया जाएगा। गौरतलब हो, मिशन 35 करोड़ के तहत इस साल उत्तर प्रदेश में वनमहोत्सव के पहले दिन यानि पांच जुलाई को 25 करोड़ पौधरोपण का रिकॉर्ड बनेगा। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल लखनऊ के कुकरैल में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चित्रकूट में और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक क्रमशः अयोध्या एवं प्रयागराज में पौधरोपण करेंगे।

वन महोत्सव को जनांदोलन बनाने के लिए हर मंडल में होंगे मंत्री, जिलों में सांसद

केवल इतना ही नहीं वन महोत्सव का यह कार्यक्रम जन आंदोलन बने इसके लिए हर मंडल में प्रदेश सरकार का कोई न कोई मंत्री मौजूद रहेगा। साथ ही सांसदों को भी जिला आवंटित कर इसके दायरे को और बढ़ा दिया गया है। इसी मकसद से हर जगह इस महोत्सव से स्थानीय जनप्रतिनिधियों सांसद, विधायक, महापौर, नगर निकायों के अध्यक्ष, पार्षद, जिला एवं क्षेत्र पंचायत के अध्यक्ष, पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधानों के अलावा सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाएं, सिविल सोसायटी, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, युवक मंगल दल, रोटरी, लायंस एवं इको क्लब, अन्य संगठन और किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े लोगों के साथ पर्यावरण सेनानियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

पौधरोपण के साथ इन वनों की होगी स्थापना

पर्यावरण सेनानी में कृषक एवं प्रधानमंत्री सम्मान के लाभार्थी, गंगा प्रहरी, सशक्त बल, महिलाएं, दिव्यांग, कम आय समूह, दृष्टिबाधित, मनरेगा जॉब कार्ड धारक, स्वयंसहायता समूह, ग्राम स्तरीय एवं नगर विकास कर्मी, वनकर्मी, आदिवासी-वनवासी, सरकारी योजनाओं एवं मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के लाभार्थी, शिक्षक-विद्यार्थी और महिलाएं शामिल हैं। वनमहोत्सव के इस अभियान में कृषि जलवायु की अनुकूलता एवं स्थानीय मांग के अनुसार अलग-अलग प्रजातियों के पौधरोपण के साथ अमृत वन, नगर वन, खाद्य वन, शक्ति वन, बाल वन, युवा वन, गंगा वन, स्मृति वाटिका, नक्षत्र वाटिका एवं पंचवटी की भी स्थापना होगी।

29 प्रजाति और 943 विरासत वृक्षों को केंद्र में रखकर चलेगा पौधरोपण अभियान

मालूम हो कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही यह मंशा जता चुके हैं कि वर्षा काल में जो पौधरोपण हो वह संबंधित क्षेत्र के एग्रो क्लाइमेट जोन (कृषि जलवायु क्षेत्र) के अनुसार हो। उनकी मंशा के अनुरूप अलग-अलग जिलों के लिए चिह्नित 29 प्रजाति और 943 विरासत वृक्षों को केंद्र में रखकर पौधरोपण का अभियान चलेगा।

लगाए जाएंगे ये पौधे

इसमें राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के साथ देशज पौधे पीपल, पाकड़, नीम, बेल, आंवला, आम, कटहल और सहजन जैसे औषधीय पौधों को वरीयता दी जाएगी। वन विभाग के अपर प्रमुख सचिव मनोज कुमार के अनुसार हमारी तैयारियां पूरी हैं। 35 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 46.49 करोड़ पौधे पौधशालाओं में उपलब्ध हैं। इनमें से 40.47 करोड़ तो सिर्फ वन विभाग की पौधशालाओं में हैं। इसके अलावा उद्यान, रेशम और निजी पौधशालाओं में क्रमशः 1.51, 0.46, 4.05 करोड़ पौधे उपलब्ध हैं। पौधरोपण के लिए ये सभी पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

15 अगस्त को 5 करोड़ पौधरोपण

वहीं 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 5 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा 6 और 7 जुलाई को क्रमशः 2.5-2.5 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे।

पांच साल में 175 करोड़ पौधों के रोपण का रखा लक्ष्य

स्टेट ऑफ फॉरेस्ट की रिपोर्ट 2021 के अनुसार उत्तर प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 9.23 फीसद हिस्से में वनावरण है। 2013 में यह 8.82 फीसद था। रिपोर्ट के अनुसार 2019 के दौरान कुल वनावरण एवं वृक्षावरण में 91 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। वर्ष 2030 तक सरकार ने इस रकबे को बढ़ाकर 15 फीसद करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकार ने अगले पांच साल में 175 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा है। मिशन 35 करोड़ इसी की कड़ी है। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार-1.0 से ही वर्षाकाल में सघन पौधरोपण करा रही है। नतीजतन 2017-18 से 2021-2022 के दौरान सरकार के प्रयास से 101.49 करोड़ पौधरोपण हो चुका है।

27 विभाग मिलकर मिशन 35 करोड़ को बनाएंगे सफल

पौधरोपण की नोडल एजेंसी वन विभाग है, लेकिन पौधरोपण के महाअभियान में वन विभाग के अलावा 26 अन्य विभाग भाग लेंगे। हर विभाग का लक्ष्य पहले से ही निर्धारित है। इस क्रम में सर्वाधिक 12.60 करोड़ और 12.32 करोड़ का लक्ष्य क्रमशः वन एवं ग्राम्य विकास विभाग का है। इसके अलावा कृषि विभाग और उद्यान विभाग का लक्ष्य क्रमशः 2.35 करोड़ एवं 1.55 करोड़ पौधरोपण का है।

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