जहां एक ओर पूरी दुनिया कोरोना से जूझ रही है वही दूसरी ओर अंतरिक्ष से धरती की ओर आ रही बड़ी आफत, 23 घंटे बाकी

रोचक तथ्य विज्ञान-टेक्नॉलॉजी

इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना वायरस (कोविड-19) संकट का सामना कर रही है। इस बीच खबर आ रही है कि धरती के पास से एक बड़ी आफत गुजरने वाली है। जिसमें महज 23 घंटे ही बचे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1998 OR2 नाम का उल्कापिंड बुधवार को धरती के पास से गुजरेगा। अगर इसकी दिशा में थोड़ा सा भी परिवर्तन आता है तो खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इस नजारे पर दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नजर बनी हुई है।

31,319 किलोमीटर प्रति घंटा है गति

उल्कापिंड की गति की बात करें तो यह 31,319 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसका मतलब 8.72 किलोमीटर प्रति सेकेंड। माना जा रहा है कि अगर इतनी तेज गति से ये धरती के किसी हिस्से से टकरा गया तो बड़ी सुनामी तक ला सकता है। इससे जुड़ी कई तस्वीरें भी इस वक्त सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

इतनी गति से यह अगर धरती के किसी हिस्से में टकराएगा तो बड़ी सुनामी ला सकता है. या फिर कई देश बर्बाद कर सकता है. हालांकि, नासा का कहना है कि इस एस्टेरॉयड से घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह धरती से करीब 62.90 लाख किलोमीटर दूर से गुजरेगा. अंतरिक्ष विज्ञान में यह दूरी बहुत ज्यादा नहीं मानी जाती लेकिन कम भी नहीं है. कुछ वैज्ञानिकों ने इसके धरती से टकराने की भी आशंका जताई है। नासा को मिला लोहे का भंडार, बेचने पर हर आदमी को मिलेंगे 9621 करोड़।इस एस्टेरॉयड को 52768 (1998 OR 2) नाम दिया गया है. इस एस्टेरॉयड को नासा ने सबसे पहले 1998 में देखा था. इसका व्यास करीब 4 किलोमीटर का है. यह एस्टेरॉयड 29 अप्रैल की दोपहर 3.26 बजे करीब धरती के पास से गुजरेगा.

नासा का क्या कहना है?

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने करीब डेढ़ महीने पहले खुलासा किया था कि धरती की तरफ एक बहुत बड़ा एस्टेरॉयड तेजी से आ रहा है. बताया जाता है कि यह एस्टेरॉयड धरती के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट से भी कई गुना बड़ा है. इस, एस्टेरॉयड की स्पीड 31,319 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यानी करीब 8.72 किलोमीटर प्रति सेंकड.

इस घटना से दुनियाभर के लोग चिंता में पड़ गए हैं। इस बीच नासा का कहना है कि इस उल्कापिंड से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह धरती से करीब 62.90 लाख किलोमीटर दूर से गुजरेगा। वैसे अंतरिक्ष विज्ञान में इस दूरी को बहुत ज्यादा नहीं माना जाता है, लेकिन कम भी नहीं मानी जाती।

पहली बार कब देखा गया था ये उल्कापिंड?

इस उल्कापिंड को 52768 (1998 OR 2) नाम दिया गया है। इसे सबसे पहले नासा ने साल 1998 में देखा था। इसका व्यास करीब 4 किलोमीटर है। नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक, नासा के सेंटर फॉर नियर-अर्थ स्टडीज के अनुसार, बुधवार 29 अप्रैल को सुबह 5:56 बजे ईस्टर्न टाइम में उल्कापिंड पृथ्वी के पास से होकर गुजरेगा।

अंतरिक्ष विज्ञानी क्या कहते हैं?

इस बारे में एक अंतरिक्ष विज्ञानी का कहना है कि उल्कापिंड 52768 सूरज का एक चक्कर लगाने में 1340 दिन या 3.7 वर्ष लगाता है। इसके बाद उल्कापिंड 52768 (1998 OR 2) का धरती की ओर अगला चक्कर 18 मई, 2031 के आसपास हो सकता है। उस समय यह 1.90 करोड़ किलोमीटर की दूरी से निकल सकता है।

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