चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्वविख्यात पर्यावरण के संत श्री सुन्दरलाल जी बहुगुणा का दुःखद निधन

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रीवा में डॉ मुकेश येंगल से रहे पारिवारिक सम्बन्ध, उनके आमंत्रण पर 28 वर्षो में तीन बार आये थे रीवा

रीवा। चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्वविख्यात पर्यावरण के संत श्री सुन्दरलाल बहुगुणा जी के निधन को रिएक्ट संस्था के अध्यक्ष डॉ मुकेश येंगल ने इसे बड़ी राष्ट्रीय क्षति के साथ ही व्यक्तिगत क्षति निरूपित करते हुए अपने साथियों के साथ शोक व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए सन 1994, 2002 और 2006 में बहुगुणा जी रीवा में आयोजित सम्मेलनों में न केवल भागीदारी निभाई बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ढेर सारा ज्ञान और आशीर्वाद प्रदान किया।


डॉ मुकेश येंगल ने बताया कि गांधीजी की विचारधारा से गहरे तक प्रभावित पदमभूषण सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान से विभूषित बहुगुणा जी स्वयं भी सादा जीवन उच्च विचार रखते और पालन करते थे। सन 2002 के राष्ट्रीय जल सम्मेलन में जब उन्हें रीवा आमंत्रित किया गया तब भी वे होटल में ना रुककर मुरलीधर कालोनी में सुबोध पाण्डेय और उनके ही घर मे रुके। तब चमोली, देहरादून, दिल्ली से इलाहाबाद पहुचे थे और रिएक्ट के साथी राकेश येंगल व दीपक शर्मा उन्हें इलाहाबाद से रीवा लेकर आये थे। इलाहाबाद स्टेशन पर ही स्वागत के लिए ले जाये गए फूलमाला और पानी बॉटल को देखकर लेने से साफ इंकार कर दिया। लगातार संपर्कों से बन चुके पारिवारिक संबंधों के चलते 28 वर्षो में तीन बार आये थे रीवा। तीन बार के रीवा आगमन पर बहुगुणा जी रीवा में साइकिल रैली में शामिल हुए, गड्डी स्थित कुष्ट आश्रम में गए, शांति मंडप में आयोजित राष्ट्रीय जल सम्मेलन में शामिल हुए और विश्विद्यालय के पर्यावरण सम्मेलन में भी भागीदारी निभाई।
श्री बहुगुणा जी के दुखद निधन पर रिएक्ट संस्था के प्रो महेश शुक्ला, प्रो श्रीनाथ पाण्डेय, डॉ मुकेश येंगल,श्रीमती सविता, जयदीप सिंह,किसान सुब्रत, राकेश येंगल, डॉ नीता तिवारी, दीपक शर्मा, सुबोध पाण्डेय, कॄष्णा सिंह, इंजी देवेन्द्र सिंह सपाक्स, अशोक सिंह गहरवार, जगजीवन लाल तिवारी, अमित पाण्डेय, डॉ शुभी माथुर मिश्रा, डॉ संजय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार आलोक पण्ड्या, डॉ पुष्पराज सिंह, अनलपाल सिंह, हीरेन्द्र सिंह, गीता विश्वकर्मा, सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।

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