ऐतिहासिक नगरी चंदेरी में स्थित प्राचीन कुआँ और बावरियों पर नहीं दिया जा रहा है नगर पालिका द्वारा कोई ध्यान

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ऑल इंडिया टुडे
लोकेशन , चंदेरी
रिपोर्टर ,केशव कोली चंदेरी जिला ब्यूरो चीफ






ऐतिहासिक नगरी चंदेरी में स्थित प्राचीन कुआँ और बावरियों पर नहीं दिया जा रहा है नगर पालिका द्वारा कोई ध्यान

ऐतिहासिक नगरी चंदेरी में जो कि विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए हैं देश-विदेश से सैलानी यहां की प्राकृतिक सुंदरता को निहारने आते हैं परंतु कोरोना काल के चलते अभी अंकुश लगा हुआ है, चारों और पहाड़ियों से घिरी चंदेरी जो कि इस समय हरियाली की चादर ओढ़े हुए हैं यहां का इतिहास जानने देश ,विदेश से सैलानी आते रहते हैं परंतु नगरपालिका के अनदेखी के चलते यहां की कुआँ बावङियों में गंदगी व्याप्त है सदियों से बावड़ी हमारी सनातन जल प्रदाय व्यवस्था का अभिन्न अंग रही है चंदेरी नगरी के इतिहास पर हम जब दृष्टिपात रखते हैं, तो यहां की प्राचीन बावड़ियां पर अपने आप नजर घूमती है, ऐतिहासिक नगरी चंदेरी में हुए बावड़ियां अपना इतिहास अपने आप शिलालेखों के माध्यम से बयां करती है आज अनेको बावरिया अपना अस्तित्व बचाने हमारी और दिन भाव से देख रही है चंदेरी में लगभग 30 से 35 बावङियां हैं बावङियां मोटे तौर पर कुआ ही है ,उसमें और कुआं में अंतर केवल इतना है कि पानी निकालने के लिए बावड़ी में सीड़िया की वजह से पानी तक पहुंचा जाता है वही कुओं से पानी की निकासी रस्सी, बाल्टी ,पर्शियन व्हील या मोटर पंप द्वारा की जाती है दूसरा अंतर यह है कि कुआँ का उपयोग पेयजल तथा सिंचाई के लिए किया जाता है वही बावङियों का निर्माण यात्रियों की प्यास बुझाने और निस्तार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया था । बावङियों की गहराई और व्यास दर्षटम होता है ,वहीं कुआँ के व्यास और गहराई को नाबार्ड जैसे संस्थान तय कराते हैं, जल प्रदाय के मामले में बावड़ी अधिक विश्वसनीय है ,वहीं चंदेरी कीं कई बावङियों में पानी की जगह कचरे से भरी गंदगी तेरती नजर आती है, पीने वाले कुएं में नाली का गंदा पानी की निकासी है, जो कि नगरपालिका को नजर तक नहीं आती है, देखा जाए तो नगरपालिका डेंगू जैसी भयानक बीमारी को आमंत्रण दे रही है,चंदेरी से केशव कोली की रिपोर्ट

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