आदिवासियों के लिए मुसीबत बन गए क्षेत्रीय दबंग लोग तालाब की मेड़ से बस्ती जाने वाले रास्ते पर हुआ कब्जा

मध्यप्रदेश न्यूज़ न्यूज़

जिले के जंगली क्षेत्र मुकुंदपुर में तकरीबन दो सौ परिवारों की आदिवासियों की बस्ती के लिए चंद क्षेत्रीय लोग सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं। तालाब की मेड़ से आदिवासियों की बस्ती के तरफ कच्चा रास्ता पुस्तैनी जाता है, इसी रास्ते पर सरहंग किस्म के लोगों ने अपना अवैध कब्जा कर डाला है, जिसके कारण गरीब आदिवासियों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। इस संबंध में अमरपाटन तहसील को जरुर अवगत कराया गया पर अभी तक तालाब की मेड़ से बस्ती की तरफ जाने वाले कच्चे मार्ग को अवैध कब्जा से मुक्त नहीं करवाया गया। दो सैकड़ा आदिवासियों और उनके बच्चों का गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है। आम गरीब लोगों के लिए चंद क्षेत्रीय दबंगों ने समस्या पैदा कर दी है। मुकुंदपुर आदिवासी नंबर दो के लिए तालाब की मेड़ से पुस्तैनी कच्चा रास्ता बना हुआ है जिसके सहारे आदिवासियों के परिजनों की आवाजाही हमेशा होती रही, लेकिन जब से चंद क्षेत्रीय दबंगों ने तालाब की मेड़ पर अघोषित अवैध कब्जा कर लिया है तब से गरीबों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। दो सैकड़ा आदिवासियों के परिजनों ने दबंगों से अवैध कब्जा हटाने के लिए निवेदन जरुर किया पर दबंगों ने एक भी नहीं सुना, उल्टा गरीब आदिवासियों के साथ गाली गलौज करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। मुकुंदपुर थाना और अमरपाटन तहसील में तैनात जिम्मेदार सरकारी अमला हकीकत से अंजान नहीं है इसके बाद भी साधारण गरीब आदिवासियों की सुनवाई किसी भी दरवाजे पर नहीं हो पाई है। आखिर यह किस तरह का लोकतंत्र और कानूनी व्यवस्था हमारे देश में लागू है कि धनवान की चुटकी बजाते सुनवाई हो जाती है और गरीबों की मुसीबत सुनने का समय किसी के पास नहीं होता है। आदिवासियों ने सतना कलेक्टर अजय कटेसरिया से विनम्र निवेदन किया है कि मुकुंदपुर तालाब पर काबिज अतिक्रमण को हटवाकर सुचारू आवागमन शुरू करवाएं।

पटवारी भवन के बगल में सरकारी पंप हाउस पर कब्जा
मुकुंदपुर में आधा दर्जन क्षेत्रीय दबंगों ने आदिवासी बस्ती नंबर दो की तरफ जाने वाले कच्चे रास्ते को बाधित करने के साथ ही सरकारी पंप हाउस को भी अपने कब्जे में ले लिया है। जिससे अब गरीब लोगों को पेयजल आपूर्ति के लिए भी भटकना पड़ेगा। बताया जाता है कि तालाब के पास ही एक सरकारी पंप हाउस लोगों की सुविधा के लिए ग्राम पंचायत ने लगवाया है, पटवारी भवन के पास लगे पंप हाउस को भी दबंगों ने अपने कब्जे में दीवाल खड़ी करके ले लिया है। जिसके कारण दो सैकड़ा आदिवासियों के साथ साथ अन्य गरीब लोगों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। शासन प्रशासन को सरेआम चुनौती देते हुए चंद दबंगों ने मुकुंदपुर में अपनी तानाशाही का डंका बजा रखा है। पिछले पंद्रह सालों से लगातार तालाब की मेड़ और सरकारी पंप हाउस पर अघोषित कब्जा बना हुआ है। परेशान आदिवासियों ने बताया कि रमाकांत मिश्र, रामलखन मिश्र, नगपति मिश्र, रामावतार सोनी, कैलाश तिवारी, रामकुशल तिवारी सहित अन्य लोगों ने कब्जा कर रखा है। आदिवासियों के लिए करो या मरो जैसी स्थिति यहां पर निर्मित हो गई है।

मंगलवार को कलेक्टर के यहां आएगा आदिवासी समूह
मुकुंदपुर में तालाब की मेड़ पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए किसी भी तरह का नियम कानून मायने नहीं रखता है, यही वजह है कि पिछले पंद्रह सालों से यह अतिक्रमण पुलिस और अमरपाटन तहसील के संरक्षण में बराबर कायम है। एक तरफ मध्यप्रदेश सरकार आदिवासियों के लिए विभिन्न योजनाओं को चलाने का दम भरती है तो दूसरी ओर चंद दबंगों ने आदिवासियों की जिंदगी को नर्क में बदल दिया है। पटवारी भवन के पास लगे पावर पंप पर भी अवैध कब्जा किया गया है इस वजह से आदिवासियों के सामने पेयजल संकट भी मुसीबत बनता है। आगामी मंगलवार को मुकुंदपुर आदिवासी बस्ती नंबर दो में रहने वाले लोगों का समूह अपने बाल बच्चों को लेकर कलेक्टर अजय कटेसरिया के दरबार में पहुंच कर अपनी विपदा से बराबर अवगत कराएगा। आदिवासियों ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि जो काम पिछले पंद्रह सालों के दौरान अमरपाटन तहसील और मुकुंदपुर थाना ने नहीं किया है वह न्याय का काम कलेक्टर सतना ही जरुर करेंगे।

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